Wednesday, 4 November 2015

" गौ रक्षा करो !! गौ हत्या बंद करो !! " और दूसरे प्राणीओं का क्या ??!!
.
एक बात मुझे समझ नहीं आ रही की , हमारे 'सो कोल्ड' हिन्दू सनातन धर्म के पौराणिक ग्रन्थों मे सिर्फ गाय को ही माता का पवित्र दर्ज़ा क्यूँ दिया गया हैं ??!! जब की भैंस तो उस से भी ज्यादा इन्सानों के काम मे आती रही हैं !!! क्या काला रंग होने से ये 'रंग भेद' हमारे धर्म ग्रन्थों के रचयिताओं ने तो हम पर नहीं थोपा ना ??!! भैंस के साथ साथ भैंसा,सांढ, बैल,बकरी, भेड, ऊंट,याक आदि प्राणीओं के दूध और चमड़े को भी हम इंसान अपनी जरूरत के मुताबिक उपयोग मे लेते आए हैं ! मेरी नज़र मे ये सभी उपयोगी प्राणी गाय जीतने ही बड़े एहसान, इन्सानों पर अलग अलग स्थानों पर कर रहे हैं !! लाखों सालों के बिकास क्रम मे इस धरती पर सब से बुद्धिमान प्राणी 'इंसान' ने वक़्त के साथ साथ इतनी जोरदार तरक्की की हैं , के बाकी के सारे प्राणीओं को बस इंसानों की सहूलियत के हिसाब से ही जीना और मरना पड रहा हैं !!! (यहाँ मैंने हाथ पैर मुह वाले गरम या ठंडे खून वाले और चलते फिरते प्राणी की बात की हैं , पेड़ पौधे और गाजर-मुली पर मेरा मंथन चालू हैं ! )grin emoticon tongue emoticon
.
दरिया मे हर बड़ा जीव अपने से छोटे जीव को खा कर ही खुद को ज़िंदा रख पाता हैं , वैसे ही जंगल या कई इलाकों मे हर बड़ा प्राणी (घाँस खानेवाले प्राणीओं को छोड़कर) अपने से छोटे प्राणी का शिकार कर के उनको खाता हैं !! अपना जीवन बचाए रखने के लिए इन मांसाहारी प्राणीओं के पास और कोई विकल्प उपलब्ध नहीं - इसलिए उन सब के लिए ये एक कुदरती प्रक्रिया और क्षमा योग्य कृत्य हैं !! ये संशोधात्मक-तार्किक सत्य हैं की , इंसानों की आहार श्रंखला मे अगर पशु-पक्षी और पानी मे रहते जीवों को शामिल ना किया जाये तो , शायद दुनिया के शुदूर इलाकों मे बसे हुए लोग ठीक से 'सर्वाइव' नहीं कर पाएंगे ! ऊपर से उतनी ज्यादा तदात मे सब्ज़ी-फलों की आपूर्ति भी इस धरती पर सभी इन्सानों के लिए ठीक से करना बड़ा कठिन होगा ! पर जहां शक्य हों , जहां बेहत्तर विकल्प हों - वहाँ इंसानों को सिर्फ अपने स्वाद के लिए किसी दूसरे प्राणीओं को लगातार मार कर खाते रेहना , कम से कम मुझे तो ठीक नहीं लगता !!
.
आज अगर भारत की बात की जाये तो , हम सब भारतीय इतने स्वार्थी हो गए हैं की - जो जो गाय को पालता हैं वो जब तक गाय दूध देती हैं तब तक ही उसको 'माता' बनाकर घर मे रखतें हैं !! जैसे ही बेचारी ने दूध देना बंद किया की , उसको बाहर रास्ते पर छोड़ दिया जाता हैं !! क्यूंकी उसको पता हैं की , इस देश मे गाय के नाम पर चारा देने वाले , और गाय के नाम पर दान देने वाले बहुत मिल जाएंगे !! भले ही फिर उसकी छोडी हुई गाय सड़कें जाम कर दें - राहदारीओं को शिंगों से उड़ाएँ - दुनियाभर का मल-मूत्र सरेआम त्यागें और गंदगी फैलाएँ !! अगर सही मे गाय या इन्सानों के काम मे आते प्राणीओं को आदर देना हों तो , सिर्फ उन्ही लोगों को इनको पालने का परमिट देना चाहिएँ जो सही मायनों मे ज़िम्मेवार पशुपालक हों ! 
.
इंसानों की फेंकी हुई प्लास्टिक बेग्स ये गायें ये सांढ खाते हैं , और बड़ी बेदर्दी से सड़कों पर दम तोड़ देते हैं !! खुदगर्ज़ इंसान अपनी सहूलियत और जरूरत खत्म होने के बाद अपने पाले हुए प्राणी से इस कदर मुह मोड देता हैं की जैसे कभी उस प्राणी को जानता ही नहीं था !!! इन्सानों के लिए उपयोगी प्राणीओं को लेकर अब कडक कानून और निश्चित व्यवस्था की जरूरत हैं !! कसाइयों पर पाबन्दीओं से पेहले हम सब को अपने अपने फर्ज़ को ध्यान मे रखना चाहिएँ !! रास्ते पर घूमने वाले तमाम प्राणीओं की नसबंदी करवा कर , सरकारी पशु संरक्षण बाड़ों मे डालना चाहिएँ , और वहाँ भी ये सब प्राणी ठीक से अपनी बची खुची ज़िंदगी ठीक से बिताएँ - ये सुनिश्चित करना चाहिएँ ! साथ मे जिन जिन पशु पालकों ने अपने प्राणीओं के प्रति अपना फर्ज़ ठीक से ना निभाया हों - उनको भी सज़ा मिलनी चाहिएँ! 
.
- आनंद माड़म . 7.00pm . 4.6.2015

Saturday, 29 August 2015

" खुद पे आई तब पुलिस गलत ??!! वाह !! "

" खुद पे आई तब पुलिस गलत ??!! वाह !! " (पूर्ण पढ़ें - लंबा लेख हैं पर तर्क-पूर्ण निष्पक्ष कड़वी बातें हैं ! सही लगे तो शेयर करें)
.
गुजरात की एक बहुत बड़ी ज्ञाति को, उसके नासमझ लीडर की ज़हरीली बातों और बेतुके तर्कों की वजह से, आज बहुत कुछ खोने की स्थिति मे ला खड़ा किया हुआ हैं !! और तो और अब, उनकी ही सरकार, और कुछ बायस न्यूज़ चेनल्स ने गुजरात पुलिस को -25,26 और 27 अगस्त-2015 के दंगे-फसाद के लिए- कटघरे मे खड़ा कर दिया हैं !!! वाह !! सरकार पहले दिन से इस आंदोलन मे लगातार पुलिस पर दबाव बना रही थी की ," जो जो मंजूरी ये लोग मांगे उनको देते जाओ, पर देखना कुछ गलत ना हों "!! बेचारी पुलिस सारे अपमान सेह सेह कर भी, सरकार के दबाव की वजह से इस आंदोलन मे बस सहयोग ही देती रही - क्योंकि आखिर यही तो बीजेपी सरकार की मुख्य 'वोट्बेंक' थी !!
.
अब 55 दिन से चला आ रहा आंदोलन 25 अगस्त को अपने चरम उफ़ान पर था ! जहां 3 लाख की मंजूरी थी वहाँ 'जीएमडीसी' मैदान मे आज 10 लाख लोग आ चुके थे !! डेढ़ घंटे के हार्दिक के बेतुके अहंकारी भाषण को - और उस भाषण मे संविधान एवं सर्वोच्च अदालत के लिए अपमानजनक शब्दों को भी, बंदोबस्त मे लगी पुलिस झेलती ही रही !! बाद मे रैली की मंजूरी नहीं थी, फिर भी महारैली निकली ! हार्दिक रैली मे से वापस आकर, बिना किसी मंजूरी के वापस 'जीएमडीसी' मैदान पर धरने पर बैठ गया, और बोला की " जब तक 'सीएम' यहाँ आकर मेरा अनशन नहीं तुडवाएगी, तब तक यहीं बैठा रहूँगा " !! पुलिस के धैर्य की सीमा अब टूट रही थी ! 24 घंटो से खड़े खड़े ड्यूटी कर रहे , पुलिसवालों ने उधर 1000-1500 की बची-खुची भीड़ को वहाँ से भगाना शुरू किया, और हार्दिक को हिरासत मे लेकर अपने साथ क्राइम ब्रांच ऑफिस ले गयी । कुछ लोगों ने विरोध किया तो उनपर लाठीयाँ भी भांजनी पड़ी ! बस फिर क्या था, 'टीवी न्यूज़ और वोट्सएप' पर पूरे गुजरात मे ये समाचार 'वाइरल' हुआ !! जो भीड़ अभी अपने अपने शहर-गाउँ और घर तक नहीं पहुंची थी, उन्होने इस समाचार से आगजनी और फसाद शुरू कर दिये !! आगजनी और दंगे भी ऐसे की, आज तक गुजरात ने कभी देखे नहीं थे !!
.
गुजरात भर मे पुलिस की गाड़ियों पर हमले हुए- कई पुलिसवालो पर हमले हुए- पुलिस चौकियो को जला दिया गया !!! कई एसटी बस और बीआरटीएस की बसों को जलाया गया, ट्रकों को जलाया गया !!! बीजेपी के सारे नेताओं को निशाना बना कर उनके घर-ऑफिस जलाए गए - गृह मंत्री और केबिनेट मंत्रियों के घरो को भी जलाया गया !!! यहाँ तक की फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और एंब्यूलन्सो को भी नहीं बक्षा गया !!! इतनी हैवानियत और बर्बरता किस लिए ??!! सिर्फ एक बेवकूफ़ 22 साल के नासमझ लीडर की हिरासत के लिए ??! जो बार बार कानून तोड़ रहा था ??!!! ऐसे मे पुलिस ने भी अपना संयम खोया...- आखिर कितना सेहते ??! कितनी झिल्लत - कितनी तौहीन और झेलते ??!!
.
आज जो जो लोग पुलिस को गलत और हैवान केह रहे हैं , उनको मैं कुछ कडवे सच बताना चाहता हूँ - " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गुनहगार सोहराबूद्दीन के साथ साथ उसकी निर्दोष बीवी को भी मार डाला था ! , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने सिर्फ शक की वजह से इशरत जहाँ और उसके 4 दोस्तों को गोलियों से भून डाला था ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने पूर्व गृह राज्यमंत्री हरेन पंडया के मर्डर की गलत 'बायस' तफतीश की थी ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने मुझे (आनंद माड़म को) जैसे एक नेक विध्यार्थी नेता को, बड़े बड़े झूठे मुकद्दमों मे फँसा कर मेरी पूरी केरियर ही खत्म कर दी थी ! " , ये पुलिस वही पुलिस हैं, जो जामनगर मे अगड़े-सवर्णों को 'स्पोर्ट्स' की कोई खास गतिविधि ना करने वाले 'सुमेर क्लब' मे सभ्यों को रमी खेलने दे रही हैं, पर मध्यम वर्ग के - पूरे साल 'स्पोर्ट्स' की गतिविधि करने वाले 'नेशनल एमेच्योर्स जिमख़ाना' के सभ्यों को रमी खेलने पर - तीन पत्ती के केस ठोककर, सब सभ्यो के सरेआम जुलूस निकाले हैं ! ", " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गोधरा मे कारसेवकों को बचाने की कोशिश तक नहीं की थी, और बाद मे जब पूरा गुजरात जला तब, धर्म के नाम पर आँख मूँद कर एक खास धर्म के वर्ग को कत्लेआम करने मे पूरा पूरा सहयोग दिया था !! "
.
"आप बताइये - क्या ये वही पुलिस हैं ना ??!"  हाँ जी ये वही पुलिस हैं !! आज आप सब अगड़े 'सोफ़ेस्टिकेट लोग', जो टीवी पर पूरे गुजरात को जला देने के बाद भी, रो रो कर जिस पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं - हाँ ये वही पुलिस हैं !! पर इस बार हमारी नज़र मे वो पुलिस इसलिए सही हैं क्यूंकी , आप सब लोग, - 'तब चुप थे, जब एक मझलूम कौशर बीबी को मार डाला गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब इशरत जहाँ और 4 लोगों को हिरासत मे लेकर तफतीश करने की बजाय सीधा गोलियों से भून दिया गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब हरेन पंडया के साथ न्याय नहीं हुआ - मेरे जैसे विध्यार्थी नेता के साथ घोर अन्याय हुआ था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब 'एनएजी' के सभ्यों के रमी खेलने पर भी जुलूस निकले थे !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब गोधरा काण्ड और उसके 'रिएक्शन' मे हो रहे कत्लेआम मे सहयोगी बनकर पुलिस चुचाप खड़ी हुई थी !!- तब आप सब की नज़र मे इस पुलिस का कोई कसूर नहीं था !! वजह सिर्फ यही थी की, तब ये सब आपके साथ नहीं हो रहा था !! और आप लोग 'वैष्णव जन' तो हैं नहीं जो 'पीड़ पराई' जानेंगे !!! मैंने इन हर गलतियों पर पुलिस को कोसा हैं - विरोध किया हैं - पर आज मैं पुलिस को गलत नहीं मानूँगा !
.
आज जब खुद पर बला आई, तो ये पुलिस अब खराब हो गयी ???!! अब तक तो, इसी पुलिस के कंधो पर से आप सब, और आपके राजकीय नेता निशाना लगाते रहें हैं !!! अब तक तो, इसी पुलिस के 'सो कोल्ड एचिवमेंट' को आगे धर धर के आप सब, मतों का ध्रुवीकरण करते रहे हैं !!! तो अब ऐसा कौन सा गज़ब ढा दिया - आपकी इस चहीती पुलिस ने ??!! शर्म करो शर्म !! पूरे गुजरात की 3 दिन तक धज्जियां उड़ाने के बाद, अब 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' ???!! वाह वाह !! काश तुम सब पेहले सही वक़्त पर इस पुलिस के खिलाफ कुछ बोले होते, तो जूठ-मूठ ही सही, - मैं भी आपके साथ सहानुभूति दिखाता !!! पर तब तो ये जुल्म आप पर थोड़े ही हो रहे थे ??!! आप क्यूँ बोलते भाई ??!! इन तीन दिनों मे गुजरात के 20,000 करोड़ का नुकसान करके, आप के खुद के पाप की वजह से मारे गए 9 लोगों का प्रायश्चित करने की बजाय, 'इस बार' सही कारवाई करने वाली पुलिस पर इल्ज़ाम मढ़ने का, एक और आप पाप मत करो !!- मानो की आप लोगों की आरक्षण मांगने की रीत गलत थी, मानों की आपने ही अफरातफरी दंगे-फसाद शुरू किए थे, मानों की आप अपनी अपनी सोसाइटी पर इकट्ठे होकर, कानून को हाथ मे ले रहे थे - पत्थर फेंक रहे थे - आग लगा रहे थे !! बदले मे पुलिस ने आप लोगों के पीछे दौड़ दौड़ कर, घर तक पीछा करके कडक कारवाई की !! श्वेतांग पटेल के साथ जो पुलिस ने किया वो बहुत घिनौना था बाकी, गेहु के साथ धुन भी पिसा !! " मुझे अफ़सोस हैं की मुझे आज इतना कड़वा लिखना पड़ा - गुजरात की शांति, अस्मिता और मुफ़्त मे मारे गए सभी को 'हार्दिक' श्रद्धांजलि ... ॐ शांति शांति शांति ...
.
- आनंद माड़म  6.50 am . 30.08.2015 

Monday, 17 August 2015

'गुजरात मे पाटीदार और उनके साथ साथ दूसरे सवर्णों की आरक्षण की माँग - कितनी सही ?!'
.
देश की कुल आबादी के 54% 'ओबीसी' के तहेत आती ज्ञाति-जातीयों को जो 27% आरक्षण मिल रहा हैं , ये उनका संवैधानिक अधिकार हैं ! आरक्षण मे 'एससी' , 'एसटी' और 'ओबीसी' ज्ञाति-जातीयों को बराबर का सामाजिक न्याय मिले , उसी भावना से कुल 49% का आरक्षण मिल रहा हैं - जब की तामिलनाडु मे तो उससे भी ज्यादा आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था अमल मे हैं ...!
.
'एससी' , 'एसटी' और 'ओबीसी' आरक्षण तब तक ज़ारी रहेगा , जब तक पिछडा समाज अगड़े समाज जितना, मुख्य धारा मे नहीं आता । कुल 22 छोटे से छोटे पॉइंट्स को देख कर आरक्षण की केटेगरी तय की जाती हैं । गुजरात का पाटीदार समाज , आरक्षण के संवैधानिक मापदंडो पर किसी भी तरह खरा नहीं उतरता ... ! और संविधान मे तो कहीं भी आर्थिक मापदंड का प्राविधान ही नहीं हैं ...!
.
130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश के किसी राज्य मे कुछेक ज्ञाति-जाती अगर हजारों - लाखों की संख्या मे सड़क पर आ जाएगी तो, उससे आरक्षण नहीं मिल जाएगा ! ना सर्वोच्च अदालत , ना कोई भी सरकार और ना कोई भी राष्ट्रीय राजनैतिक दल ऐसे आरक्षण का समर्थन करेंगे ॥ जहां बरसों से जाती आधारित जनगणना के सही सही आंकड़े सभी सरकारें ज़ाहिर करने से बच रही हैं , वहाँ अगड़ों को आरक्षण वें किस तरह से दे पाएगी ?!
.
ये 'पिछड़ों' के संवैधानिक आरक्षण का विरोध ज़्यादातर वें लोग ही कर रहे हैं जो जन्मगत 'अगड़े' हैं, और आर्थिक रूप से सक्षम हैं ! उन्होने 'जन्मगत अगड़े पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों' को आगे कर के अपने सत्ता मे टूट रहे एकाधिकार को टीकाये रखने के लिए ये आंदोलन चलवाया हैं !! उनका आक्रोश ये हैं की , " 'एससी' , 'एसटी' और 'ओबीसी' के कुछेक लोग आर्थिक पैमानों पर आगे निकल चुकने के बावजूद भी आरक्षण का लाभ क्यूँ ले रहे हैं !!" तो जवाब ये हैं की, पिछड़ेवर्गों को आरक्षण 'गरीब होने पर' नहीं लेकिन, प्रशासन में उन के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए दिया गया है । कुछेक लोग आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद भी, आज तक केन्द्रीय प्रशासन में प्रथम वर्ग की नौकरियो में 2011-12 में  सिर्फ 6.9% ही है और 27% क्वोटा आजतक भरा गया नहीं है !! सामाजिक रूप से आज भी उन ज्ञाति-जातीयों की हालत पिछड़ी हुई हैं - आज भी उनका प्रतिनिधित्व ना तो सरकार मे ज्यादा हैं - ना ही सरकारी या निजी क्षेत्र की नौकरियों मे ठीक से हैं !!
.
पाटीदार के साथ साथ अब तो क्षत्रिय राजपूत , ब्राह्मण और वैश्य समाज भी मैदान मे उतर आए हैं !! मतलब की ये सब 'अगड़े - सवर्ण' लोग अब साथ मिलकर 'आरक्षण' को ही समाप्त करने की साज़िश रच रहे हैं - और देश के संविधान की मूलतः भावना को ही ठेस पोहंचना चाहते हैं !! शुक्र हैं , की इनके साथ ना कोई राजकीय दल हैं , और ना ही भारत के संविधान की रक्षा करने वाली सर्वोच्च अदालत हैं !!
.
जिनको भी आरक्षण चाहिए , वे पेहले आरक्षण को ठीक से समझे , सारी सही संवैधानिक प्रक्रियाओं को ठीक से अनुसरे - फिर नए सर्वे होने दे  - फिर अगर मापदंडो पर खरे उतरे तब जाकर कुछ हो सकता हैं - हजारों की भीड़ से सड़क पर रैलीयों से अराजकता फैलाकर ना तो आरक्षण मिल सकता हैं , ना ही उसके एक भी मापदंड को बदला जा सकता हैं ! संविधान मे एक और बदलाव कर के 'आर्थिक मापदंड' पर भी थोड़ा आरक्षण मिले, उसके लिए किसी एक बड़े राजनैतिक दल को तो अपने साथ लाकर दिखाओ ! फिर शायद भविष्य मे कुछ हों ... !! वैसे कोई सरकार या सर्वोच्च अदालत 49% से ऊपर जाकर जो सवर्ण आर्थिक रूप से कमजोर हों - उनको 11% का और नया आरक्षण दे दें तो किसी को शायद शिकायत ना होगी ! जय हो !
.
- आनंद माड़म  6.45am . 18.08.2015 

Friday, 14 August 2015

" दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढाल - साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल !! "
.
खड़ग , ढाल , बंदूक , गोली सब फेल थे - अंग्रेजों के सामने !! ....सिर्फ और सिर्फ सत्याग्रह , असहकार आंदोलन , और 'भारत छोड़ो' - जैसे अहिंसक आंदोलन ही एक मात्र ऐसा जोरदार हथियार था , जहां उस दौर मे आधी दुनिया पर राज कर रहे , अंग्रेजों को विश्वभर मे शर्मसार होने पर मजबूर होना पड़ा था !!
.
मैं भगतसिंह ,राजगुरु , सुखदेव , चन्द्रशेखर आज़ाद , नेता जी सुभाष , खुदीराम बॉस और उनके जैसे कई शहीदों का अपमान या अवमानना नहीं कर रहा , पर इनकी हिंसक मूहीम अंग्रेजों के सामने ज्यादा टिक नहीं पायी थी ....ये भी एक कड़वा सच हैं ! सिर्फ कुछ अंग्रेज़ अफसर को मार डालने से क्या हम आज़ाद हो जाते ??!! या सशत्र गोरिल्ला युद्ध मे क्या उच्च बौद्धिक अंग्रेजों को हम हरा सकते थे ??!! खुद से ही सवाल पूछिए और जवाब सामने होगा !
.
ये गांधीजी जैसा एक महान विचारक ही था, जिसने अपनी 'बनिया बुद्धि' का प्रयोग कर के सारे देश को खुद के साथ अहिंसक आंदोलन मे जोड़ा... और सितम सेह सेह कर - मार खा खा कर ही हमने आज़ादी पायी हैं .... :) वैसे 15 अगस्त के बाद असली आज़ादी तो हमें , सरदार पटेल ने इस मुल्क के 562 राजाओं-नवाबों-निज़ामो-ठाकुरों को शाम-दाम-दंड-भेद से वश मे करके दिलाई थी !! बस एक ही अफसोस रेह गया , की अंग्रेज़ जाते जाते भारत के दो टुकड़े कर गये - और दोनों टुकड़ों मे कभी ना खत्म होने वाली कुछ आधी अधूरी कहानी छोड़ गये ... पता नहीं कब मसलें सुलझेंगे - कब अमन होगा!! आज फिर एक गांधी और चाहिए इस देश को ... जिस पर सब भरोसा करें - जिसकी बात कोई टाले नहीं - जो अहिंसा से फिर से आधी-अधूरी कहानी के मसलों को अमन से सुलझाएँ...
.
आज़ादी अमर रहें - सभी भारतवासियों को 69th आज़ादी दिन की ढेरों शुभकामनाएँ _/\_  (y)
.
- आनंद माड़म 7.00am 15.08.2015
सन.1757 ( प्लासी युद्ध से ) से सन.1857 ( विप्लव ) तक - (100 साल तक) ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ , और बाद मे सन.1858 से सन.1947 तक - (90 साल तक) ब्रिटिश राज के खिलाफ हम सब कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते रहें ! बीसवी सदी की शुरुआत मे भारत मे मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा जैसे दो तफ़्के , काँग्रेस से अलग अस्तित्व मे आयें .... और अंग्रेजों ने इन दो विचारधाराओं का पूरा फ़ायदा उठाते हुए , सन.1947 के 14-15 अगस्त को भारत का दो मुल्कों मे धर्म के आधारित विभाजन कर दिया !! एक अलग पाकिस्तान इस्लामिक देश बना , और भारत अपनी विरासत एवं उदारवादी विचारधारा के तहेत बिन सांप्रदायिक-गणतन्त्र देश बना ....
.
इस तरह का विभाजन तो आज़ादी के किसी मतवाले ने दिल से कभी नहीं चाहा होगा ...!!  विभाजन मे सरहद के बँटवारे की कुच मे हजारों की तादात मे दोनों तरफ से कत्लेआम हुआ ... इंसानियत शर्मसार हुई ! और ऐसा नफरत का माहौल फैला की आज तक दोनों मुल्क संभल नहीं पाये हैं !! दो बार की सीधी लड़ाई और लगातार चलती 'प्रोक्सिवोर' मे अब तक हजारों सैनिकों की बली चढ़ चुकी हैं , चढ़ रही हैं ...  और ये सिलसिला कब थमेगा ये कोई नहीं जानता !!
.
ऐसी आज़ादी की - जिसका इतना तगड़ा मोल चुकाना पड़ा हों - आज भी चुका रहे हैं - बड़े अफसोस की बात हैं !! खैर , फिर भी आज़ादी तो आज़ादी हैं - चाहें किसी भी किम्मत पर मिली हों !! तो आओ हम भारतवासी और पड़ौसी पाकिस्तानवासी 2 दिन झूम लें - नाच लें ...! फिर तो वापस दोनों ने बंदूकें ताननी ही हैं !! कोई भी मुल्क या उसकी आवाम कभी खराब या बुरे नहीं होते - पर कुछ कट्टर संगठन और कुछ एजेंसियां हर मुल्क मे खराब या बुरे हो सकते हैं !! हमारी शिकायत , ऐसे कट्टर संगठन एवं कुछ ऐसी एजेंसियों और उनपर क़ाबिज़ सियासतदारों के खिलाफ होनी चाहिएँ ...
.
दोनों मुल्कों की परेशान पीसी हुई आवाम को आज़ादी दिन मुबारक हों .... जय हो :) (y)
.
- आनंद माड़म 6.30pm  14.08.2015