सन.1757 ( प्लासी युद्ध से ) से सन.1857 ( विप्लव ) तक - (100 साल तक) ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ , और बाद मे सन.1858 से सन.1947 तक - (90 साल तक) ब्रिटिश राज के खिलाफ हम सब कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते रहें ! बीसवी सदी की शुरुआत मे भारत मे मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा जैसे दो तफ़्के , काँग्रेस से अलग अस्तित्व मे आयें .... और अंग्रेजों ने इन दो विचारधाराओं का पूरा फ़ायदा उठाते हुए , सन.1947 के 14-15 अगस्त को भारत का दो मुल्कों मे धर्म के आधारित विभाजन कर दिया !! एक अलग पाकिस्तान इस्लामिक देश बना , और भारत अपनी विरासत एवं उदारवादी विचारधारा के तहेत बिन सांप्रदायिक-गणतन्त्र देश बना ....
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इस तरह का विभाजन तो आज़ादी के किसी मतवाले ने दिल से कभी नहीं चाहा होगा ...!! विभाजन मे सरहद के बँटवारे की कुच मे हजारों की तादात मे दोनों तरफ से कत्लेआम हुआ ... इंसानियत शर्मसार हुई ! और ऐसा नफरत का माहौल फैला की आज तक दोनों मुल्क संभल नहीं पाये हैं !! दो बार की सीधी लड़ाई और लगातार चलती 'प्रोक्सिवोर' मे अब तक हजारों सैनिकों की बली चढ़ चुकी हैं , चढ़ रही हैं ... और ये सिलसिला कब थमेगा ये कोई नहीं जानता !!
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ऐसी आज़ादी की - जिसका इतना तगड़ा मोल चुकाना पड़ा हों - आज भी चुका रहे हैं - बड़े अफसोस की बात हैं !! खैर , फिर भी आज़ादी तो आज़ादी हैं - चाहें किसी भी किम्मत पर मिली हों !! तो आओ हम भारतवासी और पड़ौसी पाकिस्तानवासी 2 दिन झूम लें - नाच लें ...! फिर तो वापस दोनों ने बंदूकें ताननी ही हैं !! कोई भी मुल्क या उसकी आवाम कभी खराब या बुरे नहीं होते - पर कुछ कट्टर संगठन और कुछ एजेंसियां हर मुल्क मे खराब या बुरे हो सकते हैं !! हमारी शिकायत , ऐसे कट्टर संगठन एवं कुछ ऐसी एजेंसियों और उनपर क़ाबिज़ सियासतदारों के खिलाफ होनी चाहिएँ ...
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दोनों मुल्कों की परेशान पीसी हुई आवाम को आज़ादी दिन मुबारक हों .... जय हो :) (y)
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- आनंद माड़म 6.30pm 14.08.2015
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इस तरह का विभाजन तो आज़ादी के किसी मतवाले ने दिल से कभी नहीं चाहा होगा ...!! विभाजन मे सरहद के बँटवारे की कुच मे हजारों की तादात मे दोनों तरफ से कत्लेआम हुआ ... इंसानियत शर्मसार हुई ! और ऐसा नफरत का माहौल फैला की आज तक दोनों मुल्क संभल नहीं पाये हैं !! दो बार की सीधी लड़ाई और लगातार चलती 'प्रोक्सिवोर' मे अब तक हजारों सैनिकों की बली चढ़ चुकी हैं , चढ़ रही हैं ... और ये सिलसिला कब थमेगा ये कोई नहीं जानता !!
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ऐसी आज़ादी की - जिसका इतना तगड़ा मोल चुकाना पड़ा हों - आज भी चुका रहे हैं - बड़े अफसोस की बात हैं !! खैर , फिर भी आज़ादी तो आज़ादी हैं - चाहें किसी भी किम्मत पर मिली हों !! तो आओ हम भारतवासी और पड़ौसी पाकिस्तानवासी 2 दिन झूम लें - नाच लें ...! फिर तो वापस दोनों ने बंदूकें ताननी ही हैं !! कोई भी मुल्क या उसकी आवाम कभी खराब या बुरे नहीं होते - पर कुछ कट्टर संगठन और कुछ एजेंसियां हर मुल्क मे खराब या बुरे हो सकते हैं !! हमारी शिकायत , ऐसे कट्टर संगठन एवं कुछ ऐसी एजेंसियों और उनपर क़ाबिज़ सियासतदारों के खिलाफ होनी चाहिएँ ...
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दोनों मुल्कों की परेशान पीसी हुई आवाम को आज़ादी दिन मुबारक हों .... जय हो :) (y)
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- आनंद माड़म 6.30pm 14.08.2015
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