Friday, 14 August 2015

" दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढाल - साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल !! "
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खड़ग , ढाल , बंदूक , गोली सब फेल थे - अंग्रेजों के सामने !! ....सिर्फ और सिर्फ सत्याग्रह , असहकार आंदोलन , और 'भारत छोड़ो' - जैसे अहिंसक आंदोलन ही एक मात्र ऐसा जोरदार हथियार था , जहां उस दौर मे आधी दुनिया पर राज कर रहे , अंग्रेजों को विश्वभर मे शर्मसार होने पर मजबूर होना पड़ा था !!
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मैं भगतसिंह ,राजगुरु , सुखदेव , चन्द्रशेखर आज़ाद , नेता जी सुभाष , खुदीराम बॉस और उनके जैसे कई शहीदों का अपमान या अवमानना नहीं कर रहा , पर इनकी हिंसक मूहीम अंग्रेजों के सामने ज्यादा टिक नहीं पायी थी ....ये भी एक कड़वा सच हैं ! सिर्फ कुछ अंग्रेज़ अफसर को मार डालने से क्या हम आज़ाद हो जाते ??!! या सशत्र गोरिल्ला युद्ध मे क्या उच्च बौद्धिक अंग्रेजों को हम हरा सकते थे ??!! खुद से ही सवाल पूछिए और जवाब सामने होगा !
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ये गांधीजी जैसा एक महान विचारक ही था, जिसने अपनी 'बनिया बुद्धि' का प्रयोग कर के सारे देश को खुद के साथ अहिंसक आंदोलन मे जोड़ा... और सितम सेह सेह कर - मार खा खा कर ही हमने आज़ादी पायी हैं .... :) वैसे 15 अगस्त के बाद असली आज़ादी तो हमें , सरदार पटेल ने इस मुल्क के 562 राजाओं-नवाबों-निज़ामो-ठाकुरों को शाम-दाम-दंड-भेद से वश मे करके दिलाई थी !! बस एक ही अफसोस रेह गया , की अंग्रेज़ जाते जाते भारत के दो टुकड़े कर गये - और दोनों टुकड़ों मे कभी ना खत्म होने वाली कुछ आधी अधूरी कहानी छोड़ गये ... पता नहीं कब मसलें सुलझेंगे - कब अमन होगा!! आज फिर एक गांधी और चाहिए इस देश को ... जिस पर सब भरोसा करें - जिसकी बात कोई टाले नहीं - जो अहिंसा से फिर से आधी-अधूरी कहानी के मसलों को अमन से सुलझाएँ...
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आज़ादी अमर रहें - सभी भारतवासियों को 69th आज़ादी दिन की ढेरों शुभकामनाएँ _/\_  (y)
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- आनंद माड़म 7.00am 15.08.2015

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