" खुद पे आई तब पुलिस गलत ??!! वाह !! " (पूर्ण पढ़ें - लंबा लेख हैं पर तर्क-पूर्ण निष्पक्ष कड़वी बातें हैं ! सही लगे तो शेयर करें)
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गुजरात की एक बहुत बड़ी ज्ञाति को, उसके नासमझ लीडर की ज़हरीली बातों और बेतुके तर्कों की वजह से, आज बहुत कुछ खोने की स्थिति मे ला खड़ा किया हुआ हैं !! और तो और अब, उनकी ही सरकार, और कुछ बायस न्यूज़ चेनल्स ने गुजरात पुलिस को -25,26 और 27 अगस्त-2015 के दंगे-फसाद के लिए- कटघरे मे खड़ा कर दिया हैं !!! वाह !! सरकार पहले दिन से इस आंदोलन मे लगातार पुलिस पर दबाव बना रही थी की ," जो जो मंजूरी ये लोग मांगे उनको देते जाओ, पर देखना कुछ गलत ना हों "!! बेचारी पुलिस सारे अपमान सेह सेह कर भी, सरकार के दबाव की वजह से इस आंदोलन मे बस सहयोग ही देती रही - क्योंकि आखिर यही तो बीजेपी सरकार की मुख्य 'वोट्बेंक' थी !!
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अब 55 दिन से चला आ रहा आंदोलन 25 अगस्त को अपने चरम उफ़ान पर था ! जहां 3 लाख की मंजूरी थी वहाँ 'जीएमडीसी' मैदान मे आज 10 लाख लोग आ चुके थे !! डेढ़ घंटे के हार्दिक के बेतुके अहंकारी भाषण को - और उस भाषण मे संविधान एवं सर्वोच्च अदालत के लिए अपमानजनक शब्दों को भी, बंदोबस्त मे लगी पुलिस झेलती ही रही !! बाद मे रैली की मंजूरी नहीं थी, फिर भी महारैली निकली ! हार्दिक रैली मे से वापस आकर, बिना किसी मंजूरी के वापस 'जीएमडीसी' मैदान पर धरने पर बैठ गया, और बोला की " जब तक 'सीएम' यहाँ आकर मेरा अनशन नहीं तुडवाएगी, तब तक यहीं बैठा रहूँगा " !! पुलिस के धैर्य की सीमा अब टूट रही थी ! 24 घंटो से खड़े खड़े ड्यूटी कर रहे , पुलिसवालों ने उधर 1000-1500 की बची-खुची भीड़ को वहाँ से भगाना शुरू किया, और हार्दिक को हिरासत मे लेकर अपने साथ क्राइम ब्रांच ऑफिस ले गयी । कुछ लोगों ने विरोध किया तो उनपर लाठीयाँ भी भांजनी पड़ी ! बस फिर क्या था, 'टीवी न्यूज़ और वोट्सएप' पर पूरे गुजरात मे ये समाचार 'वाइरल' हुआ !! जो भीड़ अभी अपने अपने शहर-गाउँ और घर तक नहीं पहुंची थी, उन्होने इस समाचार से आगजनी और फसाद शुरू कर दिये !! आगजनी और दंगे भी ऐसे की, आज तक गुजरात ने कभी देखे नहीं थे !!
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गुजरात भर मे पुलिस की गाड़ियों पर हमले हुए- कई पुलिसवालो पर हमले हुए- पुलिस चौकियो को जला दिया गया !!! कई एसटी बस और बीआरटीएस की बसों को जलाया गया, ट्रकों को जलाया गया !!! बीजेपी के सारे नेताओं को निशाना बना कर उनके घर-ऑफिस जलाए गए - गृह मंत्री और केबिनेट मंत्रियों के घरो को भी जलाया गया !!! यहाँ तक की फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और एंब्यूलन्सो को भी नहीं बक्षा गया !!! इतनी हैवानियत और बर्बरता किस लिए ??!! सिर्फ एक बेवकूफ़ 22 साल के नासमझ लीडर की हिरासत के लिए ??! जो बार बार कानून तोड़ रहा था ??!!! ऐसे मे पुलिस ने भी अपना संयम खोया...- आखिर कितना सेहते ??! कितनी झिल्लत - कितनी तौहीन और झेलते ??!!
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आज जो जो लोग पुलिस को गलत और हैवान केह रहे हैं , उनको मैं कुछ कडवे सच बताना चाहता हूँ - " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गुनहगार सोहराबूद्दीन के साथ साथ उसकी निर्दोष बीवी को भी मार डाला था ! , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने सिर्फ शक की वजह से इशरत जहाँ और उसके 4 दोस्तों को गोलियों से भून डाला था ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने पूर्व गृह राज्यमंत्री हरेन पंडया के मर्डर की गलत 'बायस' तफतीश की थी ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने मुझे (आनंद माड़म को) जैसे एक नेक विध्यार्थी नेता को, बड़े बड़े झूठे मुकद्दमों मे फँसा कर मेरी पूरी केरियर ही खत्म कर दी थी ! " , ये पुलिस वही पुलिस हैं, जो जामनगर मे अगड़े-सवर्णों को 'स्पोर्ट्स' की कोई खास गतिविधि ना करने वाले 'सुमेर क्लब' मे सभ्यों को रमी खेलने दे रही हैं, पर मध्यम वर्ग के - पूरे साल 'स्पोर्ट्स' की गतिविधि करने वाले 'नेशनल एमेच्योर्स जिमख़ाना' के सभ्यों को रमी खेलने पर - तीन पत्ती के केस ठोककर, सब सभ्यो के सरेआम जुलूस निकाले हैं ! ", " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गोधरा मे कारसेवकों को बचाने की कोशिश तक नहीं की थी, और बाद मे जब पूरा गुजरात जला तब, धर्म के नाम पर आँख मूँद कर एक खास धर्म के वर्ग को कत्लेआम करने मे पूरा पूरा सहयोग दिया था !! "
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"आप बताइये - क्या ये वही पुलिस हैं ना ??!" हाँ जी ये वही पुलिस हैं !! आज आप सब अगड़े 'सोफ़ेस्टिकेट लोग', जो टीवी पर पूरे गुजरात को जला देने के बाद भी, रो रो कर जिस पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं - हाँ ये वही पुलिस हैं !! पर इस बार हमारी नज़र मे वो पुलिस इसलिए सही हैं क्यूंकी , आप सब लोग, - 'तब चुप थे, जब एक मझलूम कौशर बीबी को मार डाला गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब इशरत जहाँ और 4 लोगों को हिरासत मे लेकर तफतीश करने की बजाय सीधा गोलियों से भून दिया गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब हरेन पंडया के साथ न्याय नहीं हुआ - मेरे जैसे विध्यार्थी नेता के साथ घोर अन्याय हुआ था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब 'एनएजी' के सभ्यों के रमी खेलने पर भी जुलूस निकले थे !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब गोधरा काण्ड और उसके 'रिएक्शन' मे हो रहे कत्लेआम मे सहयोगी बनकर पुलिस चुचाप खड़ी हुई थी !!- तब आप सब की नज़र मे इस पुलिस का कोई कसूर नहीं था !! वजह सिर्फ यही थी की, तब ये सब आपके साथ नहीं हो रहा था !! और आप लोग 'वैष्णव जन' तो हैं नहीं जो 'पीड़ पराई' जानेंगे !!! मैंने इन हर गलतियों पर पुलिस को कोसा हैं - विरोध किया हैं - पर आज मैं पुलिस को गलत नहीं मानूँगा !
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आज जब खुद पर बला आई, तो ये पुलिस अब खराब हो गयी ???!! अब तक तो, इसी पुलिस के कंधो पर से आप सब, और आपके राजकीय नेता निशाना लगाते रहें हैं !!! अब तक तो, इसी पुलिस के 'सो कोल्ड एचिवमेंट' को आगे धर धर के आप सब, मतों का ध्रुवीकरण करते रहे हैं !!! तो अब ऐसा कौन सा गज़ब ढा दिया - आपकी इस चहीती पुलिस ने ??!! शर्म करो शर्म !! पूरे गुजरात की 3 दिन तक धज्जियां उड़ाने के बाद, अब 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' ???!! वाह वाह !! काश तुम सब पेहले सही वक़्त पर इस पुलिस के खिलाफ कुछ बोले होते, तो जूठ-मूठ ही सही, - मैं भी आपके साथ सहानुभूति दिखाता !!! पर तब तो ये जुल्म आप पर थोड़े ही हो रहे थे ??!! आप क्यूँ बोलते भाई ??!! इन तीन दिनों मे गुजरात के 20,000 करोड़ का नुकसान करके, आप के खुद के पाप की वजह से मारे गए 9 लोगों का प्रायश्चित करने की बजाय, 'इस बार' सही कारवाई करने वाली पुलिस पर इल्ज़ाम मढ़ने का, एक और आप पाप मत करो !!- मानो की आप लोगों की आरक्षण मांगने की रीत गलत थी, मानों की आपने ही अफरातफरी दंगे-फसाद शुरू किए थे, मानों की आप अपनी अपनी सोसाइटी पर इकट्ठे होकर, कानून को हाथ मे ले रहे थे - पत्थर फेंक रहे थे - आग लगा रहे थे !! बदले मे पुलिस ने आप लोगों के पीछे दौड़ दौड़ कर, घर तक पीछा करके कडक कारवाई की !! श्वेतांग पटेल के साथ जो पुलिस ने किया वो बहुत घिनौना था बाकी, गेहु के साथ धुन भी पिसा !! " मुझे अफ़सोस हैं की मुझे आज इतना कड़वा लिखना पड़ा - गुजरात की शांति, अस्मिता और मुफ़्त मे मारे गए सभी को 'हार्दिक' श्रद्धांजलि ... ॐ शांति शांति शांति ...
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- आनंद माड़म 6.50 am . 30.08.2015
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गुजरात की एक बहुत बड़ी ज्ञाति को, उसके नासमझ लीडर की ज़हरीली बातों और बेतुके तर्कों की वजह से, आज बहुत कुछ खोने की स्थिति मे ला खड़ा किया हुआ हैं !! और तो और अब, उनकी ही सरकार, और कुछ बायस न्यूज़ चेनल्स ने गुजरात पुलिस को -25,26 और 27 अगस्त-2015 के दंगे-फसाद के लिए- कटघरे मे खड़ा कर दिया हैं !!! वाह !! सरकार पहले दिन से इस आंदोलन मे लगातार पुलिस पर दबाव बना रही थी की ," जो जो मंजूरी ये लोग मांगे उनको देते जाओ, पर देखना कुछ गलत ना हों "!! बेचारी पुलिस सारे अपमान सेह सेह कर भी, सरकार के दबाव की वजह से इस आंदोलन मे बस सहयोग ही देती रही - क्योंकि आखिर यही तो बीजेपी सरकार की मुख्य 'वोट्बेंक' थी !!
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अब 55 दिन से चला आ रहा आंदोलन 25 अगस्त को अपने चरम उफ़ान पर था ! जहां 3 लाख की मंजूरी थी वहाँ 'जीएमडीसी' मैदान मे आज 10 लाख लोग आ चुके थे !! डेढ़ घंटे के हार्दिक के बेतुके अहंकारी भाषण को - और उस भाषण मे संविधान एवं सर्वोच्च अदालत के लिए अपमानजनक शब्दों को भी, बंदोबस्त मे लगी पुलिस झेलती ही रही !! बाद मे रैली की मंजूरी नहीं थी, फिर भी महारैली निकली ! हार्दिक रैली मे से वापस आकर, बिना किसी मंजूरी के वापस 'जीएमडीसी' मैदान पर धरने पर बैठ गया, और बोला की " जब तक 'सीएम' यहाँ आकर मेरा अनशन नहीं तुडवाएगी, तब तक यहीं बैठा रहूँगा " !! पुलिस के धैर्य की सीमा अब टूट रही थी ! 24 घंटो से खड़े खड़े ड्यूटी कर रहे , पुलिसवालों ने उधर 1000-1500 की बची-खुची भीड़ को वहाँ से भगाना शुरू किया, और हार्दिक को हिरासत मे लेकर अपने साथ क्राइम ब्रांच ऑफिस ले गयी । कुछ लोगों ने विरोध किया तो उनपर लाठीयाँ भी भांजनी पड़ी ! बस फिर क्या था, 'टीवी न्यूज़ और वोट्सएप' पर पूरे गुजरात मे ये समाचार 'वाइरल' हुआ !! जो भीड़ अभी अपने अपने शहर-गाउँ और घर तक नहीं पहुंची थी, उन्होने इस समाचार से आगजनी और फसाद शुरू कर दिये !! आगजनी और दंगे भी ऐसे की, आज तक गुजरात ने कभी देखे नहीं थे !!
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गुजरात भर मे पुलिस की गाड़ियों पर हमले हुए- कई पुलिसवालो पर हमले हुए- पुलिस चौकियो को जला दिया गया !!! कई एसटी बस और बीआरटीएस की बसों को जलाया गया, ट्रकों को जलाया गया !!! बीजेपी के सारे नेताओं को निशाना बना कर उनके घर-ऑफिस जलाए गए - गृह मंत्री और केबिनेट मंत्रियों के घरो को भी जलाया गया !!! यहाँ तक की फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और एंब्यूलन्सो को भी नहीं बक्षा गया !!! इतनी हैवानियत और बर्बरता किस लिए ??!! सिर्फ एक बेवकूफ़ 22 साल के नासमझ लीडर की हिरासत के लिए ??! जो बार बार कानून तोड़ रहा था ??!!! ऐसे मे पुलिस ने भी अपना संयम खोया...- आखिर कितना सेहते ??! कितनी झिल्लत - कितनी तौहीन और झेलते ??!!
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आज जो जो लोग पुलिस को गलत और हैवान केह रहे हैं , उनको मैं कुछ कडवे सच बताना चाहता हूँ - " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गुनहगार सोहराबूद्दीन के साथ साथ उसकी निर्दोष बीवी को भी मार डाला था ! , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने सिर्फ शक की वजह से इशरत जहाँ और उसके 4 दोस्तों को गोलियों से भून डाला था ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने पूर्व गृह राज्यमंत्री हरेन पंडया के मर्डर की गलत 'बायस' तफतीश की थी ! " , " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने मुझे (आनंद माड़म को) जैसे एक नेक विध्यार्थी नेता को, बड़े बड़े झूठे मुकद्दमों मे फँसा कर मेरी पूरी केरियर ही खत्म कर दी थी ! " , ये पुलिस वही पुलिस हैं, जो जामनगर मे अगड़े-सवर्णों को 'स्पोर्ट्स' की कोई खास गतिविधि ना करने वाले 'सुमेर क्लब' मे सभ्यों को रमी खेलने दे रही हैं, पर मध्यम वर्ग के - पूरे साल 'स्पोर्ट्स' की गतिविधि करने वाले 'नेशनल एमेच्योर्स जिमख़ाना' के सभ्यों को रमी खेलने पर - तीन पत्ती के केस ठोककर, सब सभ्यो के सरेआम जुलूस निकाले हैं ! ", " ये पुलिस वही पुलिस हैं, जिसने गोधरा मे कारसेवकों को बचाने की कोशिश तक नहीं की थी, और बाद मे जब पूरा गुजरात जला तब, धर्म के नाम पर आँख मूँद कर एक खास धर्म के वर्ग को कत्लेआम करने मे पूरा पूरा सहयोग दिया था !! "
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"आप बताइये - क्या ये वही पुलिस हैं ना ??!" हाँ जी ये वही पुलिस हैं !! आज आप सब अगड़े 'सोफ़ेस्टिकेट लोग', जो टीवी पर पूरे गुजरात को जला देने के बाद भी, रो रो कर जिस पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं - हाँ ये वही पुलिस हैं !! पर इस बार हमारी नज़र मे वो पुलिस इसलिए सही हैं क्यूंकी , आप सब लोग, - 'तब चुप थे, जब एक मझलूम कौशर बीबी को मार डाला गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब इशरत जहाँ और 4 लोगों को हिरासत मे लेकर तफतीश करने की बजाय सीधा गोलियों से भून दिया गया था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब हरेन पंडया के साथ न्याय नहीं हुआ - मेरे जैसे विध्यार्थी नेता के साथ घोर अन्याय हुआ था !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब 'एनएजी' के सभ्यों के रमी खेलने पर भी जुलूस निकले थे !!' 'आप सब लोग तब चुप थे, जब गोधरा काण्ड और उसके 'रिएक्शन' मे हो रहे कत्लेआम मे सहयोगी बनकर पुलिस चुचाप खड़ी हुई थी !!- तब आप सब की नज़र मे इस पुलिस का कोई कसूर नहीं था !! वजह सिर्फ यही थी की, तब ये सब आपके साथ नहीं हो रहा था !! और आप लोग 'वैष्णव जन' तो हैं नहीं जो 'पीड़ पराई' जानेंगे !!! मैंने इन हर गलतियों पर पुलिस को कोसा हैं - विरोध किया हैं - पर आज मैं पुलिस को गलत नहीं मानूँगा !
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आज जब खुद पर बला आई, तो ये पुलिस अब खराब हो गयी ???!! अब तक तो, इसी पुलिस के कंधो पर से आप सब, और आपके राजकीय नेता निशाना लगाते रहें हैं !!! अब तक तो, इसी पुलिस के 'सो कोल्ड एचिवमेंट' को आगे धर धर के आप सब, मतों का ध्रुवीकरण करते रहे हैं !!! तो अब ऐसा कौन सा गज़ब ढा दिया - आपकी इस चहीती पुलिस ने ??!! शर्म करो शर्म !! पूरे गुजरात की 3 दिन तक धज्जियां उड़ाने के बाद, अब 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' ???!! वाह वाह !! काश तुम सब पेहले सही वक़्त पर इस पुलिस के खिलाफ कुछ बोले होते, तो जूठ-मूठ ही सही, - मैं भी आपके साथ सहानुभूति दिखाता !!! पर तब तो ये जुल्म आप पर थोड़े ही हो रहे थे ??!! आप क्यूँ बोलते भाई ??!! इन तीन दिनों मे गुजरात के 20,000 करोड़ का नुकसान करके, आप के खुद के पाप की वजह से मारे गए 9 लोगों का प्रायश्चित करने की बजाय, 'इस बार' सही कारवाई करने वाली पुलिस पर इल्ज़ाम मढ़ने का, एक और आप पाप मत करो !!- मानो की आप लोगों की आरक्षण मांगने की रीत गलत थी, मानों की आपने ही अफरातफरी दंगे-फसाद शुरू किए थे, मानों की आप अपनी अपनी सोसाइटी पर इकट्ठे होकर, कानून को हाथ मे ले रहे थे - पत्थर फेंक रहे थे - आग लगा रहे थे !! बदले मे पुलिस ने आप लोगों के पीछे दौड़ दौड़ कर, घर तक पीछा करके कडक कारवाई की !! श्वेतांग पटेल के साथ जो पुलिस ने किया वो बहुत घिनौना था बाकी, गेहु के साथ धुन भी पिसा !! " मुझे अफ़सोस हैं की मुझे आज इतना कड़वा लिखना पड़ा - गुजरात की शांति, अस्मिता और मुफ़्त मे मारे गए सभी को 'हार्दिक' श्रद्धांजलि ... ॐ शांति शांति शांति ...
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- आनंद माड़म 6.50 am . 30.08.2015